RI की पिटाई, तहसीलदार से धक्कामुक्की; जमीन विवाद में प्रशासन का बड़ा एक्शन, 21 पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, 12 भेजे गए जेल
जगदलपुर, 20 जून 2026। बस्तर जिले के करपावंड में जमीन सीमांकन को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ चुका है। न्यायालय के आदेश पर तामीली करने पहुंची राजस्व और पुलिस की टीम के साथ हुज्जतबाजी और हंगामा करने वाले ग्रामीणों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। लोक शांति भंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने कुल 21 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है, जिसमें से 12 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
न्यायालय के आदेश पर सीमांकन करने पहुंची थी टीम
मिली जानकारी के अनुसार, तहसीलदार न्यायालय के आदेश पर 19 जून को पांच आवेदकों की जमीन का सीमांकन (नापी) करने के लिए तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (RI), पटवारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा था।

सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही कुछ ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए शासकीय कार्य को पूरी तरह रोक दिया और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ झूमाझटकी व हुज्जतबाजी की कोशिश की।
प्रशासनिक सख्ती: 12 उपद्रवी भेजे गए जेल
प्रशासन ने शासकीय कार्य में बाधा और कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को बेहद गंभीरता से लिया है: 21 लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए माहौल खराब करने और लोक शांति भंग करने की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 लोगों को हिरासत में लिया। वही पकड़े गए लोगों में से गंभीर रूप से बाधा उत्पन्न करने वाले 12 लोगों को न्यायिक रिमांड पर सीधे जेल भेज दिया गया है।

मुख्य आरोपियों पर BNS की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR)
इस पूरे हंगामे और अधिकारियों से बदसलूकी के मामले में दो मुख्य नाम सामने आए हैं। पुलिस ने डाकीन नेताम और मनीराम बघेल को इस विवाद का मुख्य सूत्रधार माना है। दोनों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, सरकारी अधिकारियों को धमकाने और हुज्जतबाजी करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
प्रशासन की दोटूक: कानून हाथ में लेने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
करपावंड पुलिस और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग और साक्ष्यों के आधार पर गहन जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान जैसे-जैसे नए तथ्य और चेहरे सामने आएंगे, आगे भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि न्यायालय के आदेशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा और इसमें अड़ंगा डालने या कानून को हाथ में लेने का प्रयास करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।










